પોસ્ટ્સ

જૂન, 2019 માંથી પોસ્ટ્સ બતાવી રહ્યું છે
कुछ ना कुछ तो है ... तेरे मेरे दरमियान.. चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही . लेकिन कुछ ना कुछ तो है ... जो बांध के रखे है हम दोनो को ... चाहे इसे दोस्ती समजों ... चाहे प्यार ... चाहे रूहानी रिश्ता ... चाहे कुछ भी समजों ... लेकिन है तो बस ... चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही ... पर कुछ ना कुछ तो है ... अजीब सी चुभन है ये जो भूले ना भुलाये है ... हर पल ढूंढती है ये आँखे ... बस एक ही तस्वीर जो बरसो आंखो मे समाई है ... चाहे इसे कुछ भी समजों ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा लेकिन कुछ तो है ... बिछडके इस दुनिया कौन मिलता है फिर से ? .. किस्मत ने ही फिर से मिलाया हमे ... तुम चाहे मानो या ना मानो ... कुछ तो है .... थोड़ा सा तो थोड़ा सा ... लेकिन है बहुत अजीब सा ... एक मीठी चुभन सा ... एक रूहानी नशा सा ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा .... कुछ तो है जरा सा ... : निरंजन ...
ए जिंदगी .. तु जे पाने के वास्ते .. कतरा कतरा मरता रहा हर पल .... ना रात को सो पाया ... ना दिन को जाग पाया ठीक से एक पल ... तु जे पाने की जिद मे भागता रहा मे हर दम ... जब पाया तु ज को पल दो पल ... तब भी तु रुकी ना एक पल .. कल के लीये आज को खोता रहा हर पल ... ना कल मिला ना तुम आज तक .. ए जिंदगी बस तुज को मिलने के वास्ते मे तो भागता रहा हर पल... कभी तु चलती है हवा के संग .. कभी रेंगती हुई .. कभी थम गई रुके सांस की तरह ... जब भी देखु नई लगे तु ... ना समजा हू ना समज पाउ ... बस जब भी चाहू अपनी ही लगे हर पल ..
जिंदगी का एक पहेलू है ... चलते रहेना ... वक्त चाहे कैसा भी हो .... बस .... रुकना नहीं है ... अगर अछ्छा वक्त है ... तो ... जिंदगी जीने के लीये चलते रहो ... अगर ... वक्त बुरा है तो .. समय बिताने के लीये चलते रहो ... बस चलते रहेना है ... आखरी मंजिल की और ... वही पर रास्ते में सकसेस--फैल्यौर ... नामके कई सारे पड़ाव मिलेंगे ... वो सारे अच्छे ... बुरे ... पड़ावों से निकलकर आती है जिंदगी ... चलते चलते ... जितनी भी जिओ ... सिर्फ लाजवाब होनी चाहिये जिंदगी .... उसके लीये सिर्फ चलना जरूरी है ... हर हाल में ... आखिर जिंदगी ही तो है ... :निरंजन
कुछ ना कुछ तो है ...तेरे मेरे दरमियान.. चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही . लेकिन कुछ ना कुछ तो है ... जो बांध के रखे है हम दोनो को ... चाहे इसे दोस्ती समजों ... चाहे प्यार ... चाहे रूहानी रिश्ता ... चाहे कुछ भी समजों ... लेकिन है तो बस ... चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही ... पर कुछ ना कुछ तो है ... अजीब सी चुभन है ये जो भूले ना भुलाये है ... हर पल ढूंढती है ये आँखे ... बस एक ही तस्वीर जो बरसो आंखो मे समाई है ... चाहे इसे कुछ भी समजों ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा लेकिन कुछ तो है ... बिछडके इस दुनिया  कौन मिलता है फिर से ?  .. किस्मत  ने ही फिर से मिलाया हमे ... तुम चाहे मानो या ना मानो ... कुछ तो है .... थोड़ा सा तो थोड़ा सा ... लेकिन है बहुत अजीब सा ... एक मीठी चुभन सा ... एक रूहानी नशा सा ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा .... कुछ तो है जरा सा ... : निरंजन ...
તું એટલે .... જિંદગી નું એક હસીન ખ્વાબ .. જે ક્યારેય પૂરું થવાનું નથી છતા એ ખ્વાબ જિંદગી ના છેલ્લા શ્વાસ સુધી તૂટવા પણ દેવા નું નથી .... તું એટલે ... જિંદગી ની સફર ની  પૂર્ણતા ... જે ક્યારેય પૂરી થવા ની નથી છતા એ સફર  છેલ્લા શ્વાસ સુધી અટકાવવા ની પણ નથી ... તું એટલે .... જિંદગી નો એક એવો મુકામ ... જે ક્યારેય હાસિલ થવા નો નથી છતા એ મુકામ છેલ્લા શ્વાસ સુધી છોડવા નો પણ નથી ... તું એટલે .... જિંદગી ની અવિરત મુસાફરી ... જે ની મંજિલ મળવા ની જ નથી પણ  મુસાફરી  છેલ્લા શ્વાસ સુધી અટકવા ની પણ નથી ... તું એટલે ... જિંદગી ના મરુસ્થલ નું મ્રુગજળ  ... જે ક્યારેય જિંદગી ની  મ્રુગ ત્રુસ્ણા પૂરી કરવા નું નથી ... પણ મ્રુગ એ છેલ્લા શ્વાસ સુધી સમજવા નું પણ નથી ... તુ એટલે ... જીંદગી ... જીંદગી એટલે જ  .. અવિરત ભાગતા રહેવુ ... નિરંજન...
इस खिलती  हुई सुबह मे...  थोड़ासा तो थोड़ासा याद तो कर मुजे... कहा मागी है पूरी जिंदगी तूजसे ... बस तेरी एक साँस उधार કર मुजे ... : निरंजन
तू एक अजीब सा सवाल है... और शायद ...  तू ही इसका अजीब सा जवाब है ...  दिल फिर भी बेताब है तेरे लिये ... ये पल दो पल का  सुकून है तो है... ये पल दो पल का जुनून हैं तो है... लेकिन ... बहोत खूबसूरत ख्वाब सा है ये पल . जी लेने दे अपनी मस्ती में ये पल ..  फिलहाल एक हसीन गलत फहमी के साथ जी लेने दे ये पल .. क्या पता  शायद हो ना हो अगले पल  .... : निरंजन ...

जिंदगी तुजे बहोत चाहता हूँ ...

जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ... मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू .. ए जिंदगी तेरे वास्ते मे हरदम जुकना चाहता हू ... बस सिर्फ तेरे वास्ते .. अपने आप से सुलह करना चाहता हू ... माना की बला की खूब सूरत हो तुम .. पर बड़ी मगरूर भी हो तुम ... जितना सोचा उनसे कई गुना गहेरी हो तुम ... लगती हो मोम सी नाजुक ... पर पत्थर की चट्टान सी हो तुम ... एक उम्र गुजर गई तुजे सोचते हुए ..देखते हुए ... जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ... मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू .. ए जिंदगी तेरे वास्ते मे हरदम जुकना चाहता हू ... बस सिर्फ तेरे वास्ते .. अपने आप से सुलह करना चहता हू ... आज तक जीतता आया हू खुद से ... बस सिर्फ एक बार हारना भी  चाहता हू .... तो सिर्फ तूजसे ..... क्यो की ... जैसी भी है तु .... चाहते भी है तु जे जी जान से .. जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ...मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू .. : निरंजन ...

जिंदगी है की बस चलती रहेगी ...? ?

दिन है तो उसके बाद रात तो आयेगी ... सुबह है तो शाम  तो ढलेगि .... जिंदगी है तो मुस्केलीया तो रहेगी ... तकलीफें तो रहेगी जिंदगी है की बस चलती रहेगी ... जब तक है जान ... जिंदगी चलती ही रहेगी ... बस ये सिर्फ आगे की और बढ़ती रहे ... कदम कदम चलते रहे तो आखिर मंजिल तो मिलेगी ही मिलेगी ... : निरंजन ...