कुछ ना कुछ तो है ...
तेरे मेरे दरमियान..
चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही .
लेकिन कुछ ना कुछ तो है ...
जो बांध के रखे है हम दोनो को ...
चाहे इसे दोस्ती समजों ...
चाहे प्यार ...
चाहे रूहानी रिश्ता ...
चाहे कुछ भी समजों ...
लेकिन है तो बस ...
चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही ...
पर कुछ ना कुछ तो है ...
अजीब सी चुभन है ये जो भूले ना भुलाये है ...
हर पल ढूंढती है ये आँखे ...
बस एक ही तस्वीर जो बरसो आंखो मे समाई है ...
चाहे इसे कुछ भी समजों ...
थोड़ा सा तो थोड़ा सा लेकिन कुछ तो है ...
बिछडके इस दुनिया कौन मिलता है फिर से ? ..
किस्मत ने ही फिर से मिलाया हमे ...
तुम चाहे मानो या ना मानो ...
कुछ तो है ....
थोड़ा सा तो थोड़ा सा ...
लेकिन है बहुत अजीब सा ...
एक मीठी चुभन सा ...
एक रूहानी नशा सा ...
थोड़ा सा तो थोड़ा सा ....
कुछ तो है जरा सा ...
: निरंजन ...
एक नई शुरुआत...
नमस्ते दोस्तों, यह ब्लॉग मेरी कलम से लिखी गई कहानियों, मेरे विचार का खजाना है। मैं अपनी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को कहानियों के माध्यम से आपके साथ साझा करूंगा। रहस्यमयी कहानियाँ, थ्रिलर कहानियाँ, मेरे विचार, आपका प्यार और प्रतिसाद मेरे लिए प्रेरणादायक है। आइए, मिलकर साहित्य और विचारो की इस नई यात्रा को शुरू करें... बिच मे कुछ समय के लिये कुछ अंगत व्यस्तता के कारण मुझे ब्लॉग से दूर रहना पड़ा था अब नियमित रूप से मिलते रहेंगे... – निरंजन
ટિપ્પણીઓ
ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો