कुछ ना कुछ तो है ... तेरे मेरे दरमियान.. चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही . लेकिन कुछ ना कुछ तो है ... जो बांध के रखे है हम दोनो को ... चाहे इसे दोस्ती समजों ... चाहे प्यार ... चाहे रूहानी रिश्ता ... चाहे कुछ भी समजों ... लेकिन है तो बस ... चाहे थोड़ा थोड़ा सा ही सही ... पर कुछ ना कुछ तो है ... अजीब सी चुभन है ये जो भूले ना भुलाये है ... हर पल ढूंढती है ये आँखे ... बस एक ही तस्वीर जो बरसो आंखो मे समाई है ... चाहे इसे कुछ भी समजों ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा लेकिन कुछ तो है ... बिछडके इस दुनिया कौन मिलता है फिर से ? .. किस्मत ने ही फिर से मिलाया हमे ... तुम चाहे मानो या ना मानो ... कुछ तो है .... थोड़ा सा तो थोड़ा सा ... लेकिन है बहुत अजीब सा ... एक मीठी चुभन सा ... एक रूहानी नशा सा ... थोड़ा सा तो थोड़ा सा .... कुछ तो है जरा सा ... : निरंजन ...

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