जिंदगी तुजे बहोत चाहता हूँ ...

जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ...
मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू ..
ए जिंदगी तेरे वास्ते मे हरदम जुकना चाहता हू ...
बस सिर्फ तेरे वास्ते ..
अपने आप से सुलह करना चाहता हू ...
माना की बला की खूब सूरत हो तुम ..
पर बड़ी मगरूर भी हो तुम ...
जितना सोचा उनसे कई गुना गहेरी हो तुम ...
लगती हो मोम सी नाजुक ...
पर पत्थर की चट्टान सी हो तुम ...
एक उम्र गुजर गई तुजे सोचते हुए ..देखते हुए ...
जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ...
मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू ..
ए जिंदगी तेरे वास्ते मे हरदम जुकना चाहता हू ...
बस सिर्फ तेरे वास्ते ..
अपने आप से सुलह करना चहता हू ...
आज तक जीतता आया हू खुद से ...
बस सिर्फ एक बार हारना भी  चाहता हू ....
तो सिर्फ तूजसे .....
क्यो की ...
जैसी भी है तु ....
चाहते भी है तु जे जी जान से ..
जमाना हो गया खुद से मुजे  लड़ते जगड्ते ...मे अपने आप से अब सुलह करना चहता हू ..


: निरंजन ...

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