ए जिंदगी .. तु जे पाने के वास्ते .. कतरा कतरा मरता रहा हर पल .... ना रात को सो पाया ... ना दिन को जाग पाया ठीक से एक पल ... तु जे पाने की जिद मे भागता रहा मे हर दम ... जब पाया तु ज को पल दो पल ... तब भी तु रुकी ना एक पल .. कल के लीये आज को खोता रहा हर पल ... ना कल मिला ना तुम आज तक .. ए जिंदगी बस तुज को मिलने के वास्ते मे तो भागता रहा हर पल... कभी तु चलती है हवा के संग .. कभी रेंगती हुई .. कभी थम गई रुके सांस की तरह ... जब भी देखु नई लगे तु ... ना समजा हू ना समज पाउ ... बस जब भी चाहू अपनी ही लगे हर पल ..

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