यार ... आज बैठे बैठे दिमाग मे एक ही ख्याल बार बार आ रहा है ... ये मेरे देश को क्या हुआ है ? पहेले तो कभी ना ऐसा था ... ये तो बड़े दिलवालो का देश था ... यहा कोई भी, कही भी , खुद का बसेरा कर शकता था ... भाईचारा भी कमाल था .. फिर मेरे देश को हुआ क्या ? क्यू आज चारो और अफरा तफरी ... हर कोई भाग रहा है अपने घर की और ...वतन की और... सबके चहेरे पे छायी एक अजीब सी मायूसी ... जैसे निकल रहा हो कोई अपने ही दीलसे... भाग रहे है सब अपने ही अपनो से ... डर है यहा सब को... सबसे ... यारो ... ये सब को हुआ क्या है ? मेरे देश मे ये पसरी खामोशी क्यू है ? मेरे देश को हुआ क्या है ? ये पहेले तो कभी ना ऐसा था ... ये टुकडो मे बट रहा है आज ... हर दिल से खून निकल रहा है आज ... फिर भी क्यू ... हर कोई कुछ बोलने से भी डर रहा है ... सब अजनबी से मेहसूस करते है अपने ही देश मे ... पता नही पर क्यू ... एक अजीब सी खामोशी है आज मेरे देश मे ... फिर भी .. ये पहेले तो कभी ना ऐसा था ... :--निरंजन ...
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