ચોમાસા ની ખૂબ સુરતી જ આ છે ...ક્યાય પણ નિકલી જાઓ ...ચારે બાજુ કુદરતી ખૂબ સુરતી વેરાયેલી જોવા મલે...રવિવારે ગાડી લઈ ને નિકલી જવા નુ ...પછી ...
"में और मेरा केमेरा अक्षर निकल पढ़ते है इन अंजान रास्तों पर ...तुम मिल ही जाती हो कहीं ना कहीं ...इन बेहती हवा ओ में या दूर कहीं बादल में छूपे किरणों में...या फिर कहीं खेत में लहेराती फसलों में ...दूर कोई गावो में खेलते बच्चों में  ...या शाम की उतरते अंधेरों में  ...फिर लौट जाता हू में और मेरा केमेर  घर की और ....घनी रात में नींद की आगोश में समाने के लिये ...शायद सपनों में मिलने की चाह के साथ ....एक बात तो है तय जिंदगी तुम मिलती हो मुजे हर रास्ते पर ...हर चौराहे पर ...सुबह ...शाम ...कहीं पर भी ...हर हमेशा खिल खिलाती ...वाकई में जिंदगी तुम बहोत खूबसूरत हो ...














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